Monday, 26 August 2019

मजबूर हो रही है

मजबूरी

वो आज मुझसे दूर हो रही है,
ना चाहते हुए भी मजबूर हो रही है।

वो उन अनचाहे रिश्तों को निभा रही है,
उन्हें निभाते-निभाते अपना वजूद खोती जा रही है।

अपने आंसू और दर्द को अब मुझे नहीं बता रही है वो,
शायद वो मुझे अपना नहीं समझती, मुझे पराया करती जा रही है वो।

कहती है मुझे अब तुझसे दूर जाना है,
पर शायद उसे नहीं पता, मेरे और करीब आती जा रही है् वो।

माना अब हम एक साथ नहीं, 
पर आज भी हम दोनों को उस दूरी का अहसास नहीं।

आज भी करती है वो मेरी फिकर पर जताना चाहती नहीं,
दोबार से सब बयान करके मुझे सताना चाहती नहीं।

मैं उसे अपने से ज्यादा जानता हूँ,
पर उस नादां को कौन समझाये, मैं उसके दर्द को उससे पहले पहचानता हूँ।


"मैगी"

2 comments:

  1. वक्त वक्त पे ये वक्त से पहचान कराती है,,

    ये जिंदगी है,
    जब जी चाहे इम्तिहान कराती है,,

    पास या फ़ेल,, ये अलग मसला है।

    ये वो है जो हमे जीना सिखाती है।

    G.t

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