Sunday, 11 August 2019

मेरा हमसफर- एक अधूरा ख्वाब

मेरा हमसफर- एक अधूरा ख्वाब



मेरी आँखों के आंशू को अपने हाथों से पोछता
मेरे अंधियारे जीवन में वो उजाला भर देता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

यूँ तो गमों से बहुत गहरा रिश्ता रहा मेरा
वो लबों पर बस मेरे हमेशा मुस्कान रखता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

मेरे दिल की उदासी, आँखों की नमी
मेरी निगाहों से वो मेरी हर बात समझ लेता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

वक्त, बेवक्त मुझे हसाता, अपनेपन का अहसास मुझे दिलाता
वो मरहम बनकर मेरा हर दर्द मिटाता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

अंधेरा बहुत है जीवन में वो दीपक सा बन जाता
कांटो भरी मेरी राह में वह फूलों सा बिछ जाता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

मैं बहता पानी दरिया का, वो किनारा बन जाता
अकेला सा जान मुझे, उम्रभर मेरा साथ निभाता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

मैं तपन सूरज की, वो चाँद सा शीतल बन जाता
मेरे उदास जीवन में, वो खुशियाँ भर जाता
काश एक ऐसा हमसफर मेरा भी होता।

                                                                              "मीठी"

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