Saturday, 27 July 2019

विरह: बिखरी यादों का संसार

विरह: बिखरी यादों का संसार



तेरी मीठी यादों का झराना, जब-जब दरिया ए दिल में गिरता है।
झर-झऱ लहरोंं सा शोर मेरे अन्तर्मन में भी बजता है।


तेरी यादों का झोका भी हवा की भाँति चलता है,
आता है जाता है फिर दब कर कहीं आँखों में रूक जाता है ।
आता है जाता है फिर थक कर कहीं आँखों में रूक जाता है ।

कुछ बिखरी यादों का संसार लिये, एक विरह की आग लिये,
अब तन-मन हर रोज मेरा जलता है, लहरों सा शोर मेरे मन में बजता है ।
झर-झऱ लहरोंं सा शोर मेरे अन्तर्मन में बजता है।



                                                                                                                          "मीठी"

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